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श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कन्जारुणम्।। कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्। पट्पीत मानहु तडित रूचि...

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को...

1. नारायण : ईश्वर, परमात्मा 2. विष्णु : हर जगह विराजमान रहने वाले 3. वषट्कार: यज्ञ से प्रसन्न होने वाले 4. भूतभव्यभवत्प्रभु: भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी 5....